जानिए क्या हे यह #METOO, और किस तरह से इसकी शुरुआत हुई…?

भारत आज कल वायरल तथ्यों का और सोशियल मिडिया द्वारा प्रकशित पोस्ट को सत्य में तोलने का आदि होता जा रहा हे। यहाँ आये दिन कोई न कोई मुद्दा वायरल बनकर तब तक सुर्खियों में रहेता हे जब तक की कोई नया मुद्दा उन्हें यही से हाथ न लगे। इन दिनों को देखे तो आज भी सिर्फ छोटे से दो ही शब्दों की काफी चर्चा है। यह दो शब्द अंग्रेजी के हैं और इनकी वजह से आज कल एक आंदोलन सा शुरू हो गया है। इन छोटे शब्दों से देश-दुनिया के बड़े बड़े अस्तित्व हिलने लगे हे। यहाँ हम बात कर रहे हैं #MeToo की। हिंदी भाषा में इसके मायने हुए ‘मैं भी’ जिसे इस तरह से भी समज शकते हे की मेरे साथ भी। दरअसल, यह #metoo वाला हेसटेग यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिलाओं का आंदोलन है। #MeToo के जरिए वो सोशल मीडिया पर अपने साथ हुई बदसलूकी या यौन उत्पीड़न का इस हेसटेग के साथ बेख़ौफ़ खुलासा करती हैं। कुछ दिनों पहले भारत में भी बीते वक्त की एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता अमेरिका से भारत लौटीं। यहां उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में अभिनेता नाना पाटेकर पर उनके साथ हुई बदसलूकी के आरोप लगाए। इसके बाद कुछ और बड़े नामों पर इसी तरह के आरोप लगने लगे। यह सिलसिला अब तक जारी है। यहाँ सब कुछ सच भी नहीं हो सकता, और सब कुछ जुट भी नहीं। क्योकि हर स्थिति के कई माईने हो शकते हे। बहरहाल, हम यहां आपको इस MeToo कैंपेन यानी आंदोलन से जुड़ी जरूरी बातें बता रहे हैं।

◆ क्या है #MeToo आंदोलन :-

ऐसा माना जाता हे की आज कल हर जगह बड़े बड़े लोगो को हिला देने वाले इस #MeToo आंदोलन की शुरुआत आज से करीब 12 साल पहले हुई थी। और सोशल मीडिया पर यह आंदोलन ठीक एक साल पहले यानी की तकरीबन अक्टूबर 2017 में वायरल हुआ। वेसे तो इसे पूरी तरह से जानना इतना सहज नही लेकिन आज हम प्रयास करेंगे की आप को वो सब बता शके जिसकी जानकारी आवश्यक हे।

आइए आपको इस आंदोलन और इससे जुड़ी सारी कहानी बताते हैं…

हेसटेग #metoo द्वारा चलने वाला मी टू मूवमेंट, यह एक तरह का महिला आंदोलन हैं। इस मुहीम में जुडकर महिलायें अपने आप पर हुये योन शोषण की वारदातों को अनुभव सहित और आरोप प्रत्यारोप के साथ लिखकर दुनिया के साथ साझा कर रही हैं। एक तरह से तो यह भी कहा जा सकता हैं कि यह एक तरह की लड़ाई हैं, जिसमें महिलायेँ अपने ऊपर हुये अत्याचारों के खिलाफ एकजुट होकर दुनिया के सामने आवाज उठा रही हैं.

#MeToo के जरिए वो सोशल मीडिया पर अपने साथ हुई बदसलूकी या यौन उत्पीड़न का इस हेसटेग के साथ खुलासा करती हैं।

इसे एक हेश टेग की तरह #metoo के साथ सोशल मिडिया पर लिखा जाता हैं, और उसके साथ ही वायरल पोस्ट में अपने साथ हुये अत्याचारों को शब्दों में बया किया जाता हैं। वास्तव में बहोत साल पहेले सामने आये इस आंदोलन का चलन 2017 से लगातार बढ़ता जा रहा हैं, और इण्डिया में भी इससे जुडकर आज कई महिलायेँ आवाज उठा रही हैं। वास्तव में तो #metoo वाले इस वाक्य की उत्पत्ति 2006 में हुई थी, यह कैसे हुआ और किस तरह यह सहज पोस्ट से एक आंदोलन की तरह व्यापक बन गया। इसके लिए हम इतिहास के कई पन्नो को नेट पर मोजुदा जानकारी सहित पलटेंगे.

अपने मूल स्वरूप में यह आंदोलन यौन शोषण का शिकार हुई महिलाओं की मदद के लिए शुरू हुआ। 2006 में अमेरिकी सिविल राइट ऐक्टिविस्ट तराना बर्क ने इस आंदोलन की सबसे पहेले शुरुआत की थी। तराना बर्क खुद सेक्शुअल असॉल्ट सर्वाइवर हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने ये भी बताया था कि बचपन से लेकर बड़े होने तक, किस प्रकार से उनके साथ तीन बार यौन शोषण हो चुका है। मायस्पेस नाम के सोशल नेटवर्क में तराना बर्क के इन दो ही शब्दों (metoo यानि के मेरे साथ भी) ने एक आंदोलन का रूप ले लिया। समय के चलते यहा कई आरोपों और खुलासो का दोर शुरू हुआ। जिसमें यौन शोषण पीड़ितों को इस बात का अहसास दिलाने की भी कोशिश की गई कि, इन हालातो से गुजरने वाली सिर्फ आप अकेली नहीं हैं।

◆ कब और कैसे शुरू हुआ…? :-

यह आंदोलन भले ही वर्तमान में खलबली मचा रहा हो, लेकिन इसकी जड़े तो भूतकाल तक दबी हुई हे। आज से तकरीबन 12 साल पहले अमेरिका की एक सामाजिक कार्यकर्ता तराना बर्क ने खुद के साथ हुए यौन शोषण का जिक्र करते हुए सबसे पहले इन शब्दों का इस्तेमाल किया। बहरहाल, बर्क की पहल का असर इण्डिया और देश-दुनिया में तो 2017 के अंत में शुरू हुआ। इसी मुहीम के चलते हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन पर 50 से ज्यादा महिलाओं ने 30 साल के दौरान अपने साथ हुए यौन शोषण के आरोप लगाए। न्यूयॉर्क टाइम्स और न्यूयॉर्कर जैसे बड़े अखबारों ने इस पर बहुत लंबी रिपोर्ट भी प्रकाशित कीं। हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने भी वाइंस्टीन पर आरोप लगाए। कहा जाता हे की इसी मुहीम के दौरान सोशल मीडिया पर किसी ने उन्हें टैग करते हुए लिखा कि वो #MeToo के जरिए अपनी बात को रखे। और इस सलाह के आधार पर मिलानो ने ऐसा ही किया था। और इसी के तहेत 32 हजार से ज्यादा महिलाओं ने इस हेसटेग का उपयोग करते हुए अपनी आपबीती सोशियल मिडिया के माध्यम से साझा की।

◆ मी टू मूवमेंट का इतिहास क्या हैं…? :-

इस आंदोलन के पीछे एक अजीब सी कहानी छिपी हुए हे, या ऐसा भी कह शकते हे की एक घटना हैं जिस वजह से इस मूवमेन्ट की शुरुवात हुई। शुरुआत 2006में हुआ और फिर इसके बाद 2017 से यह व्यापक रूप से फैल गया और आज कल तो हर तरह विश्व भर में फेले हुए सोशल मीडिया के जरिये दिखाई और सुनाई भी दे रहा हैं।

अब यह सवाल भी होना स्वभाविक ही होगा की इसकी शुरुआत किन हालातो में हुई थी…? तो जवाब यहां भी वही हे, जो आगे दहोराया गया हे। तराना बर्क नामक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस शब्द “Me Too” का उपयोग सबसे पहले 2006 में किया था, इन दो शब्दों के प्रयोग से उनका मुख्य उद्देश्य त्रासदी से गृसित महिलाओं को जागृत करना और उनके साथ खड़े होकर उन्हे हिम्मत देना था। उन्होंने इस शब्द “मी टू” को एक डॉक्यूमेंट्री टाइटल की तरह उपयोग किया, जिससे हर वो महिला जो इस तरह की कहानी को सभी के सामने रखने में असहज महसूस करती हैं। वो इस वाक्य के जरिये अपनी बात को बेख़ौफ़ बनकर कह सके। बर्क को यह बात उस समय महसूस हुई जब बातचीत के दौरान 13 वर्ष की एक लड़की जो अपनी बात कहने में असमर्थ थी, और इसी पल को समझ कर बर्क ने “मी टू” वाक्य को जन्म दिया। बर्क उस बच्ची की स्थितिओ को समझ शकने में सक्षम थी, क्योकि वो खुद इन हालातो का समना कर चुकी थी। लेकिन जब उनका सामना उस बच्ची से हुआ तो उन्हें यह अहसास हुआ के मेरे साथ भी यही हुआ था। इस घटना प्रेरित यह शब्द अस्तित्व में आया, कई साल बाद सोशियल मिडिया पर इसे हेसटेग द्वारा दर्शाया गया।

यह समझना कि यह मजबूत आंदोलन #metoo 2017 में शुरू हुआ गलत होगा। इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी साल 2006 में एक महिला के प्रयासों से।

◆ मी टू दश साल बाद हेसटेग बना :-

मी टू की शुरुआत 2006 की थी, लेकिन हेश टेग के रूप में #MeToo की शुरुवात हॉलीवुड अभिनेत्री एलीसा मिलाने ने अपने ट्वीट के जरिये 15 अक्टूबर 2017 को की, उन्होने अपने अनुभवों को #MeToo के जरिये दुनियाँ के सामने रखा। उनके ट्वीट में, उन्होने होलीवुड डिरेक्टर हार्वे वीनस्टीन द्वारा उनके साथ किये गये दुर्व्यवहार को लिखा, और साथ ही उन्होने दुनिया भर के लोगो से यह अपील भी की, कि वे अपने ऊपर हुई इस प्रकार की त्रासदी को भी #metoo (मी टू हेश टेग) लगाकर दुनियाँ के सामने रखे।

यह वह शुरुआत थी जो आने वाले वक्त में विशाल जनसमूह में फेलने वाली थी। 15 अक्टूबर 2017 के इस ट्वीट को काफी लोगो द्वारा सराहा गया, और एलीसा के जज्बे को सन्मान भी मिला। इस ट्विट के तुरंत 24 घंटों के अंदर अंदर कई करोड़ो लोगो ने इस हेश टेग का इस्तेमाल भी कर लिया। दुनिया भर में इस ट्विट के बाद करोड़ो लोगो ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की, और काइयों ने अपने जीवन के अनुभव को भी सोशल मीडिया पर साझा किया।

एलीसा मिलाने द्वारा फिर से शुरू हुए इस आंदोलन के शंखनाद ने महिलाओं को शक्ति दी, और आज यह एक आंदोलन की तरह उभर कर सामने आ रहा हैं। यह महिला का शोषण विरोध हे जो महिला सशक्तिकरण को दृढ़ता से सबके सामने दुनियाभर में पेश कर रहा हैं।

आज के आधुनिक दोर में दुनियाँ का हर देश कई तरह के शोषण से ग्रसित रहता हैं। हर शिक्षित समाज की वृद्धि के साथ-साथ इस तरह की शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण की वारदातें भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। इस फैलते हुए विकृत रोग का एक कारण हैं इसका खुलकर विरोध ना कर पाना। यही वह कारण हे जिस कारण शोषण को बढ़ावा मिलता रहा हैं।

◆ Metoo फाउंडर इस महिला का नाम है टराना बर्क :-

तराना बर्क अश्वेत लड़कियों और महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली वकील और सोशियल एक्टिविस्ट भी हैं। दुनिया की कई और महिलाओं की तरह तराना बर्क खुद भी सेक्सुअल हैरेसमेंट का शिकार हुई थीं। उन्होंने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया था, कि जब वो सिर्फ 6 साल की बच्ची थीं तो उनके पड़ोस में रहने वाले एक लड़के ने उनके साथ गंभीर किस्म की छेड़छाड़ की थी। इसके बाद जब वो बड़ी हुई तो उनके साथ बलात्कार भी हुआ था। और शायद इन्हीं वजहों से बर्क को पता था कि इन घटनाओं का कैसा असर किसी भी महिला अस्तित्व और मन पर पड़ता है। उनका मानना है कि अश्वेत महिलाओं के खिलाफ उनके देश में बहुत किस्म के अमानवीय व्यवहार आज भी होते हैं। इसीलिए उन्होंने ऐसी लड़कियों और महिलाओं को इस सदमे से उबारने की दिशा में मदद शुरू की।

तराना बर्क का कहना है कि उन्होंने 2006 में आज के #metoo हेसटेग वाले इस आंदोलन की शुरुआत की थी। वास्तव में तो वे इस आंदोलन के जरिए छोटी उम्र की अश्वेत महिलाओं को न्याय दिलवाना चाहती थीं। उस दौर में फेसबुक, ट्विटर तो नहीं लेकिन माय स्पेस का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्टिव था। तराना बर्क ने उसी प्लेटफॉर्म पर ये हेसटेग उन महिलाओं को एकजुट करने के लिए बनाया था। लेकिन इसका इतना प्रभाव नही हुआ जो आजकल हमे दिख रहा हे। लेकिन 2017 में जब एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने इसे पहली बार ट्विटर पर प्रयोग किया तो लोग उन्हें इस हेसटेग की अविष्कारक मानने लगे। लेकिन ऐसे में तराना ने खुद अपना एक पुराना वीडियो ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने इस शब्द का प्रयोग एलिसा से कई साल पहले किया था। ऐसा उन्होंने किसी आपसी लड़ाई के लिए नहीं बल्कि इसलिए किया था ताकि लोगों को इसके पीछे की मेहनत भी नजर आनी चाहिए।

◆ किस घटना ने करवाई तराना से #metoo की शुरुआत :-

यह घटना एक छोटी सी लड़की के साथ हुई थी, जिसका नाम था हेवन। एक कैंप में तराना जब लोगों से मिलने गई, तो उन लोगो के बिच उन्हें हेवन मिली। लेकिन हेवन का व्यवहार अजीब तरह का और बहुत चीखने चिल्लाने वाला था। जब तराना ने उससे धीरे से बात की तो उन्हें पता चला, की उस बच्ची की मा का बॉयफ्रेंड उसका यौन उत्पीड़न कर रहा था। इस घटना से मिलने वाले ज़टके और दर्द ने बर्क को पुऋ तरह से तोड़ दिया। इस बात को सुनकर उनके जेहन में सिर्फ दो ही शब्द उभरे, ‘मैं भी’, ‘मी टू’। बस यहीं से उन्होंने सोशल मीडिया पर एक टाइटल वाक्य बनाया और इसके खिलाफ लड़ने के अपने काम में जुट गईं।

◆ अक्टूबर 2017 में हुआ #metoo वायरल :-

पिछले साल इसी आंदोलन के चलते अक्टूबर माह में मशहूर अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स और द न्यू यॉर्कर ने अमेरिकी फिल्म प्रड्यूसर हार्वी वाइंस्टीन को लेकर कई रहस्यमय और बड़े खुलासे किए। मिलती माहिती के आधार पर कहे तो इस रिपोर्ट में उनके 3 दशकों के करियर के दौरान वाइंस्टीन पर 80 से अधिक महिलाओं ने रेप, यौन शोषण जेसे आरोप लगाए हे। इन सभी एक्ट्रेसेज ने बताया कि जब उन्होंने हार्वी के साथ काम किया था तब हार्वी ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया था। इसके बाद एक के बाद हॉलीवुड के कई बड़े नाम यौन शोषण के आरोपी के रूप में सामने आए। इसमें केविन स्पेसी जैसे बड़े एक्टर का नाम भी शामिल था। इस आंदोलन की पहली आधिकारिक सालगिरह के आस-पास भारत में भी यह मूवमेंट जोर पकड़ रहा है। लेकिन इसी के बीच एक तथ्य हे की 16 अक्टूबर 2017 को हॉलिवुड अदाकारा एलिसा मिलानो को भी सोशल साइट पर एक मेसेज मिला था। इस मेसेज में यह साफ तौर पर लिखा था, कि अगर कभी आपका सेक्शुअल हैरसमेंट हुआ है तो आप MeToo का स्टेटस लगाएं ताकि लोगों को इस समस्या की गंभीरता का अंदाजा हो। शायद हम इस रोग से ग्रसित हे की पहेल हम नहीं करते । हमेशा से ही हम किसी एक पहेल की तलाश करते हे।

उस वक्त मिलानो ने भी अपनी समस्या को #Metoo लिख कर ट्वीट किया और उनका यह ट्वीट वायरल हो गया। उस वायरल ट्वीट के बाद तमाम महिलाएं सोशल मीडिया पर इस हेसटेग का इस्तेमाल कर अपने साथ हुए यौन शोषण का जिक्र करने लगीं। देखते-देखते इस मूवमेंट में हॉलिवुड के बाद अन्य तमाम भागो से महिलाएं भी शामिल हो गईं और इस अन्दोल ने मानो विश्वव्यापी रूप ले लिया।

◆ भारत में इस मुहीम की शुरुआत केसे हुई :-

भारत में सब धीमा हे, लेकिन हर वाद विवाद चलता बहोत लंबा हे। भारत में सोशल मीडिया पर #MeToo वाली मूवमेंट अभी हाल ही में इंडिया लोटने वाली ऐक्ट्रेस तनुश्री दत्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों के बाद शुरू हुआ। तनुश्री दत्ता ने कुछ इस प्रकार के आरोप लगाऐ है कि, साल 2008 में आई फिल्म हॉर्न ओके प्लीज के लिए उन्हें एक आइटम नंबर शूट करना था। उनके कहे अनुसार उस शूटिंग के दिन नाना पाटेकर भी सेट पर मौजूद थे। तनुश्री का आरोप यह है कि शूट के बीच में नाना उनके नजदीक आए थे, और उन्होंने उन्हें गलत तरीके से छूना शुरू कर दिया। तनुश्री ने यह भी कहा कि इस सबके लिए नाना पाटेकर ने डांस कोरियोग्राफर गणेश आचार्य के साथ मिलकर भड़काऊ और अश्लील स्टेप्स भी ऐड करवाए थे। उस वक्त जब फिल्म के गाने पर कोरियोग्राफी की जा रही थी, तब नाना पाटेकर ने सभी कोरियोग्राफर को हटाकर खुद ही डांस सीखाने की कोशिश की। साथ ही तनुश्री का कहना था, कि नाना ने आपत्तिजनक सीन करने के लिये भी उनके साथ जबरजस्ती की। इस वाकिये के बारे मे तनुश्री ने कोरियॉग्रफर गणेश आचार्य पर भी नाना का साथ देने का आरोप लगाया, और दोनों ही के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है। अब तो यह मामला बहोत गर्म होता जा रहा हे।

भारत में तनुश्री के आरोपों के बाद वायरल हुआ #MeToo हेसटेग।

10 साल पहले तक तनुश्री दत्ता भारत में थीं और अच्छी अभिनेत्री मानी जाती थीं। (अब वह बोलीवुड से दूर रह रही हे) इसी दौरान ‘हॉर्न ओके प्लीज’ के सेट पर उनके साथ कुछ घटना हुई। जब बोलीवुड ऐक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक इंटरव्यू के दौरान नाना पाटेकर, कोरियॉग्रफर गणेश आचार्य पर सेक्शुअल हैरसमेंट के आरोप लगाए तो भारत में भी बड़े पैमाने पर #MeToo मूवमेंट की शुरुआत हो गई। तनुश्री के बाद तमाम महिला कलाकारों, पत्रकारों ने भी अपने साथ हुए सेक्शुअल हैरसमेंट की कहानीओ को इसी हेसटेग के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कीया है। इस कड़ी में कई दिग्गज नामों पर आरोप लग चुके हे। ऊपर दिए गए नामों के अलावा मशहूर कलाकार आलोक नाथ, मंत्री एमजे अकबर जैसे नाम भी इसी लिस्ट में सामने आए हे। यह मामला आजकल गरमाया हुआ हे। घटना क्रम कुछ अजीब सा हे, की कुछ दिन पहले दत्ता भारत लौटीं। उन्होंने तभी एक इंटरव्यू दिया। इसमें उस घटना का जिक्र किया। कुछ लोगों ने इसे #MeToo से जोड़ दिया। यह मामला चल ही रहा था कि अभिनेता आलोकनाथ, केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर, सीपीआई-एम केरल के विधायक माधवन मुकेश और डायरेक्टर विकास बहल भी आरोपों के घेरे में आ गए। कंगना ने विकास और विनीता नंदा ने आलोकनाथ पर आरोप लगाए। इसी मामले में कंगना और सोनम कपूर के बीच बयानबाजी भी हुई। अकबर जर्नलिज्म से सियासत में आए। उन पर आरोप पत्रकारिता के दौर के ही हैं।

◆ तनुश्री द्वारा शिकायत दर्ज की गई :-

तनुश्री ने अपने साथ हुये पुराने दुर्व्यवहार के लिये नाना पाटेकर के खिलाफ महाराष्ट्र महिला आयोग में भी शिकायत दर्ज करवाई हैं, उनकी शिकायत के अनुसार उन्होने 10 वर्ष पूर्व हुई इस घटना की जांच के आदेश भी दिये हैं। उनकी एफ़आईआर में और भी ऐसे कई नाम हे जैसे की गणेश आचार्य, सामी सिद्दीकी, एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना कार्यकर्ताओं के नाम भी शामिल हैं।

एक न्यूज़ के मुताबिक तनुश्री के वकील ने बताया कि यह वाकिया महाराष्ट्र राज्य आयोग के आधार पर मामला दर्ज किया गया हैं। जिसे वे यौन उत्पीड़न अधिनियम धारा 9 के तहत जिला अधिकारी के अंतर्गत ले जायेंगे। और जरूरत पड़ने पर इससे आगे कार्यवाही भी हो शकती हे।

तनुश्री ने मिडिया को यह भी बताया कि उन्होने आईपीसी धारा 354, 354 (ए), धारा 34 और धारा 50 के तहत मामला आगे बढ़ायेंगी। उन्होने अपनी शिकायत में यह भी लिखा हैं कि शूटिंग के पहले ही वो ये साफ निर्देश दे चुकी थी कि वो किसी भी आपत्तीजनक सीन अथवा डांस स्टेप के लिए परफॉर्म नहीं करेंगी, लेकिन शूटिंग के दिन नाना का बर्ताव खराब था। उन्होने यह भी बताया कि ये सब करने के लिये गणेश आचार्य को भी धमकाया जा रहा था और जब तनुश्री ने इस बात का विरोध भी किया तो उन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया। इस सबके बाद उन्होने गोरेगाँव पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज करवानी चाही पर किसी ने उनकी शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज नहीं की। तनुश्री ने 2008 मार्च मे सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन में भी शिकायत की लेकिन कोई बात आगे नहीं बढ़ी।

इस पूरी घटना का तनुश्री के जीवन पर गहरा असर हुआ और वे ट्रोमा में चली गई साथ ही उन्हे कई करोड़ो का नुकसान भी हुआ।

◆ नाना पाटेकर की प्रतिक्रिया :-

नाना पाटेकर ने भी इस मामले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, और सभी आरोपो का खंडन भी किया। उनका कहना तो यह हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। दस साल पहले जो उन्होने कहा था आज भी वे उस पर कायम हैं, एवं बाद में वे रिपोटर के सवालों का जवाब बिना दिये ही वहाँ से चले गए। यह भी बताया जा रहा हैं कि गणेश आचार्य ने भी इस घटना की पुष्टि नहीं की हैं। उनका कहना हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। इस तरह इस मामले में कई लोग तनुश्री के साथ हैं, तो कई लोग नाना पाटेकर के साथ। यह आरोप किस हद तक सही हैं, इसका अभी कोई अनुमान नहीं हैं।

◆ विनीता नन्दा और आलोक नाथ केस :-

विनीता नन्दा ने आलोक नाथ के लिए मी टू हेश टेग का उपयोग किया और अपने साथ हुये हादसे का सोशियल मिडिया पर खुलासा भी किया। उन्होने आलोक नाथ का नाम साफ तोर पर तो नहीं लिया, लेकिन संस्कारी शब्द का उपयोग किया। यह घटना तकरीबन 20 साल पुरानी हैं, नब्बे के दशक में टीवी पर प्रसारित होने वाले तारा सिरियल की डायरेक्टर विनीता नन्दा ने सिरियल के मुख्य किरदार आलोक नाथ के खिलाफ योन शोषण का आरोप लगाया। उन्होने इस बारे में बताया कि सिरियल के दौरान एक डिनर पार्टी में हम मिले थे जिसमे आलोक की पत्नी नहीं आई थी। उस वक्त विनीता की ड्रिंक में कुछ मिलाया गया था, जिसके बाद उन्हे थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ। पार्टी देर रात 2 बजे तक चली और उसके बाद जब विनीता अकेले घर जा रही थी, तब ही रास्ते में उन्हे आलोक ने कार रोक कर छोडने को कहा। विनीता कार में बैठ गई। विनीता नशे में थी लेकिन इतना समझ पा रही थी कि उन्हे जबरजस्ती शराब पिलाई जा रही हैं, और उनके मुंह ने कपड़ा घुसाया जा रहा हैं। उसके बाद उन्हे घर छोड़ दिया गया। अगली सुबह उन्हे महसूस हुआ कि उनके साथ योन शोषण हुआ हैं। इसके बाद उन्होने यह भी बताया कि इस तारा सिरियल की मुख्य अभिनेत्री नवनीत निशान के साथ भी आलोक ने दुर्व्यवहार किया था, जिसका विरोध किया गया और बाद में उनके खिलाफ एक्शन भी लिया गया।

विनीता नन्दा के आरोप के बाद तारा की मुख्य अभिनेत्री नवनीत निशान ने भी उनका सपोर्ट किया। विनीता ने बताया कि इस हादसे के बाद उन्होने मानसिक संतुलन खो दिया था, और कभी इस मुद्दे के विरोध की हिम्मत नहीं जुटा पाई। लेकिन 20 वर्षों के बाद मी टू मूवमेंट के कारण उन में यह हिम्मत आई और उन्होने सभी के सामने अपनी आपबीती रखी।

इसी तरह इस हेश टेग मी टू मूवमेंट ने पूरी दुनिया को हिला दिया हैं। कई लोग इसका जमकर समर्थन कर रहे हैं, तो कई लोग ऐसे भी हे जो इसका विरोध कर रहे हे। लोगो का मानना हैं को इसका सदुपयोग भी हो रहा हे तो साथ ही इसका भरपूर दुरपयोग भी किया जा सकता हैं। कई बार फेमस होने के लिए अथवा सहानुभूति पाने के लिये भी महिलाएं इसका उपयोग कर सकती हैं। इस तरह मी टू आंदोलन आजकल देश भर मे काफी प्रसिद्ध हो चुका हैं।

◆ भारत में कई बड़े नामो पर आरोप लग चुके हे :-

तनुश्री दत्ता की तरफ से ‘हॉर्न ओके प्लीज़’ फिल्म शूट समय को दर्शाते हुए नाना पाटेकर और गणेश आचार्य पर आरोप लगाने के बाद यह मामला वायरल हो गया। अबतक इसकी जद में कई बड़े नाम आ चुके हैं। अधिकतर नाम बॉलिवुड से हैं। क्वीन फिल्म के डायरेक्टर विकास बहल, लेखक चेतन भगत, एआईबी के सीईओ तन्मय भट्ट, ऐक्टर रजत कपूर, सिंगर कैलाश खेर, ऐक्टर आलोक नाथ फिल्म इंडस्ट्री के कुछ ऐसे बड़े नाम हैं जिनपर सेक्शुअल हैरसमेंट के आरोप लगे हैं। इसके अलावा मोदी सरकार में मंत्री एमजे अकबर पर भी कुछ महिलाओं ने आरोप लगाए हैं। ये आरोप तबके हैं जब एमजे अकबर राजनीति में नहीं बल्कि पत्रकारिता में सक्रिय थे। इनमे से कई ने माफी मांगी हैं और कुछ ने आरोपो को गलत करार कर दिया हैं.

( नोट :- यह लेख ओनलाईन वेबपेज द्वारा प्राप्त माहिती सूत्रों के आधार पर तैयार किया गया हे। अगर आपको इसमें कोई भी क्षति लगे तो आप हमें hello@sarjak.org पर लिख शकते हे। गलतिया होना स्वाभाविक हे और इसमें सुधार के लिए हम तैयार हे। यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए हे। )

Advertisements

Author: Sultan

Simple person with typically thinking and creative heart...

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.