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यूँ सालों बित गए
बारिशमें भीगना ठीक है, हम तो ओसमें भीगे है, हॅसते रोना, रोते हॅसना, यही जीवनकी मांग है.
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मेरी चुप्पीमें झाँखकर देख
तुम अगर आना चाहो तो पुकारलो वही कही दूरसे ही, हम गुम है तेरी यादोंके सायें तले, यही इस्तेहार निकले






