Gazal Hindi Poet's Corner

तरस मेरी इतनी

तरस मेरी इतनी ज्यादा बढ़ गई है
के खुदको पीके ही अब जी रहा हूँ मैं.

हौंसला मुझ मे भी कोई कम नही
इश्क़ को ईमान समझ जी रहा हूँ मैं.

यादोके हर कतरेमें मैं बिखरा हूँ
खुद को खुदसे मिलाने जी रहा हूँ मै

~ रेखा पटेल ‘विनोदिनी’

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