Gazal Hindi Poet's Corner

चलो कुछ नहीं

चलो कुछ नहीं तो हम गम बाँट लेते है,
है एक दूसरे के करीब यूँही मान लेते है.

ना सुनाओं तुम यूँ घड़कनोका शोर भले,
आँसू की भाषा हम अच्छी जान लेते है.

कहाँ फर्क पड़ता वो मीठे है या नमकीन,
बारात या जनाजा यहाँ आँसू शान लेते है

~ रेखा पटेल ‘विनोदिनी’

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