Gazal Hindi Poet's Corner

गर इश्क है तो

गर इश्क है तो इसको तरीके से जताकर तो देखो
किसी के दिलमें प्यारका एक चराग जलाकर तो देखो

मुज से भी अच्छे लोग तुम्हे मिलेंगे इस कायनात मे
धर से मिले फूरसत तो बहार निकल कर तो देखो

घोंसलो से निकलो तुम घटाओं में नहा कर भी देखो
ज़िन्दगी के मुक्कमल तजुरबे को उठाकर तो देखो,

बस शराब में ही नशा हो ये बात लाझमी नही है दोस्त
कीसी के आखो से गीरते आंसुओ को पिकर तो देखो,

पत्थर की तरह ख़ुद को बहोत छीलकर तराशा है,
तुम पथ्थर को मेरी तरहा इन्शान बनाकर तो देखो,

पकड़ना है खुशीयो को मुस्कुराकर हाथ अपना बढालो
किसी के विरान दिल मे एक चमन बसाकर तो देखो

इक ग़ज़ल तुज पर लिखने को दिल चाहता है बहुत,
मेरे अलफाझ को अपने दिल मे सजाकर तो देखो

तुम्हे तो फूरसत नही है मेरे लिए, ओ मेरे हमनशी
छोड़कर चाँद को मेरी इक तरसती नजर तो देखो

मुसलसल तेरी याद के संमंदर मे कब तक भीगती रहुं मे
कभी बनके दरिया मुजे मौजो संग उछालकर तो देखो

मेरी सोला मिजाजी उस के सिवा किसी को रास ना आयेगी
दम है तो, उसी की तरह मेरे नखरे उठाकर तो देखो

~ रेखा पटेल ‘विनोदिनी’

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