Gazal Hindi Poet's Corner

उसने मेरा नाम

उसने मेरा नाम अब लकीर रक्खा है
अपने हाथोंमें मुजको बसाके रक्खा है

नाम शमा मेरा जाने कबसे रक्खा है
बनाके लौ उम्रभर हमें जलाके रक्खा है

मंदिर मे बुत बनाके सजाके रक्खा है
करके दिलमें कैद हमें छुपाके रक्खा है

मेरी आँखों में उसने आईना रक्खा है
यही खुद घर अपना बनाके रक्खा है

मुझे अपना साया बनाकर रक्खा है
मेरा वजूद इस तरहा मिटाके रक्खा है

~ रेखा पटेल ‘विनोदिनी’

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