Gazal Hindi Poet's Corner

आज फिर सपनेमे

आज फिर सपने मे उनसे मुलाक़ात हुई
जो अधूरी थी वो गुफ्तगु बार बार हुई

बिना कहे वक्त भी कुछ ढहर शा गया
वो यादे पुरानी आज सब तार तार हुई

वो पूछते रहे बारबार हाले बयान दिलका
फीर बिन सावन बारिस भी धारदार हुई.

धने अंधेरेमे दिलके दिये की बाती चली
पाकर निंदमे भी साथ, रात जानदार हुई

रात हो या दिन, हर वकत ढहर जाता है
आते ही उनके इंतज़ार सदा बहार हुई

~ रेखा पटेल ‘विनोदिनी’

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