Gazal Hindi Poet's Corner

जन्नत की चाह

तुम ज़न्नत की चाह मे जेहादी हो गए
तो हमलों के हम भी तो आदि हो गए

क्या मुक़ाम पाएगा चुनाव अब के बरस
कुर्ते सारे सिल्क के थे वो खादी हो गए

वो क्या रहा होगा जज़्बा ए मुल्क भगत का
की भरी जवानी में मोत को राज़ी हो गए

अब के क्या देखे हम एक आबाद मुल्क को
सपनें सारे आबादी के माज़ी हो गए

इश्क़ का शरुर कुछ इस तरह चढ़ा था की
काफ़िर से घूमते थे, अब नमाज़ी हो गए

~ हिमांशु मेकवान

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