Gazal Hindi

कुछ इस तरहा आप

कुछ इस तरहा आप बदलते चले गये
हमें अकेले छोडके यु चलते चले गये

न कह पाऊँगा कभी मुहब्बत है तुझसे
तस्वीर से तुम्हारी सब कहेते चले गये

सूरज के संग दिनभर तपते रहे विरह में
सुबह होने तक हम तारे गिनते चले गये

बहेते रहे नदी की तरह बेहिसाब बहुत
दरिया समजके तुझमे समाते चले गये

रहेगी अगर मुझपे मालिक की इनायत
तेरी ही मुहब्बत में सदियों बहेते चले गये

~ रेखा पटेल ‘विनोदिनी’

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.